"प्रगतिवादी साहित्यक यात्रामे एकटा नवका इतिहास : “मिथिला मुक्तिके संनेश”" :: majheri.com
प्रगतिवादी कला, संस्कार, सस्कृति आओर जनसाहित्य समाज रुपान्तरके एकटा बहुत भारी नमहर बैचारिक हतियार अइछ । प्रगतिशिल समाजिक जीवन निर्माणमे प्रगतिवादी कला साहित्यके बहुत नमहर भुमकिा रहैत अइछ । गलत संस्कार, संस्कृति आओर बुर्जुवा कला साहित्यके भण्डाफोर करैत जखन नयाँ ढंगके प्रगतिवादी यर्थाथवादी कला, साहित्यमे नवका इतिहास थपैत अइछ तखन हमर मन खुशीसे गदगद होइत अइछ । सामाजवादी यर्थाथवादी कला आ जनसाहित्यक सुन्दरता उपर अहेन निमन निखारल कलमक प्रस्तुतिसे जनसाहित्य दुनियाँमे थप उत्साह और मनोबल पैदा केने अइछ । नेपाली सामाजमे अहेन निमन निखारल कलम अधिकारमे पछाडि परल मधेशके जन्मभुमीसे निकलैत रहत त निश्चित रुपमे नेपाली और मधेशी जनता सबके मुहार फेर सकैत अइछ । भौतिकवादी आओर द्धन्दवादी दृष्टिकोणसे भरल आमुल परिवर्तन लछित अहेन वर्गचेत, वर्गप्रेम जनसाहित्यसे राष्ट्रा आ जनताके दुःख, पिडा, लक्ष्य, उदेश्य, ईच्छा, आकांक्षा, लगयतक सारा चिजके रक्षा करैत अइछ । जखन नेपाली जनताके हरेक क्षेत्र उपर सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनितिक आओर कानुनी रुपमे सेहो एकलौटी सासन चलाबै खातिर राज्यपक्षसे दलबलके प्रयोग कैरके कठिनसेकठिन दमन, शोष...