रथवा पे सवार, अर्घ्य लेवे आहिल बाड़े हो... by amarujala.com

कानपुर। रथवा पे सवार, अर्घ्य लेवे आहिल बाड़े हो... इन्हीं पंक्तियों के साथ उदय होते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने 36 घंटे के कठिन तप का परायण किया। सूर्य उपासना के महापर्व डाला छठ पर अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने ठेकवा, अदरक खाकर व्रत खेला और छठ मइया से परिवार और बेटों की सलामती की दुआ मांगी।
गाजे, बाजे के साथ सूर्य उदय से पहले महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घटों पर पहुंचे। कई महिलाओं ने मन्नत पूरी होने पर कोसी भरी। घंटो पानी में खड़े रहने के बाद सूर्य की पहली किरण को देख महिलाओं ने गऊ माता के दूध से सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान एक ओर घाटों पर जोरदार आतिशबाजी की गई। महिलाओं ने घर की सुख शांति और बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना की। बच्चों ने घंटो पटाखे छुड़ाकर पूजा का समापन किया। सूर्य देवता को जल चढ़ाने के बाद घर लौटी महिलाओं ने पूजा की टोकरी में रखे फल, ठेकुआ आदि प्रसाद को खाने के बाद जल पीकर व्रत को तोड़ा। अखिल भारतीय भोजपुरी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष गहमरी ने बताया कि महिलाएं भी मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत को रखती है। छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि पानी की गंदगी ने महिलाओं को विचलित किया।

मुंडन हुए,
छठ व्रत के परायण के मौके पर मुंडन संस्कार का भी आयोजन किया गया। घाटों पर बच्चों के मुंडन किए गए।
प्रसाद बांटा
पूजन करके घर आई महिलाओं ने व्रत खोलने के बाद आस पड़ोस में प्रसाद का वितरण किया। ठेकुआ, फल के प्रसाद के वितरण के लिए बच्चे सुबह सुबह निकल पड़े।
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