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रथवा पे सवार, अर्घ्य लेवे आहिल बाड़े हो... by amarujala.com

कानपुर। रथवा पे सवार, अर्घ्य लेवे आहिल बाड़े हो... इन्हीं पंक्तियों के साथ उदय होते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने 36 घंटे के कठिन तप का परायण किया। सूर्य उपासना के महापर्व डाला छठ पर अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने ठेकवा, अदरक खाकर व्रत खेला और छठ मइया से परिवार और बेटों की सलामती की दुआ मांगी। गाजे, बाजे के साथ सूर्य उदय से पहले महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घटों पर पहुंचे। कई महिलाओं ने मन्नत पूरी होने पर कोसी भरी। घंटो पानी में खड़े रहने के बाद सूर्य की पहली किरण को देख महिलाओं ने गऊ माता के दूध से सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान एक ओर घाटों पर जोरदार आतिशबाजी की गई। महिलाओं ने घर की सुख शांति और बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना की। बच्चों ने घंटो पटाखे छुड़ाकर पूजा का समापन किया। सूर्य देवता को जल चढ़ाने के बाद घर लौटी महिलाओं ने पूजा की टोकरी में रखे फल, ठेकुआ आदि प्रसाद को खाने के बाद जल पीकर व्रत को तोड़ा। अखिल भारतीय भोजपुरी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष गहमरी ने बताया कि महिलाएं भी मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत को रखती है। छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संतोष सिंह ने...

अमेरिका में भी मनाया गया छठ पर्व by http://www.livehindustan.com

भारत में लाखों लोगों की आस्था से जुड़े, सूर्योपासना के प्राचीन हिन्दू पर्व छठ ने अब अमेरिका में भी दस्तक दे दी है और वहां बसे भारतीयों ने बाकायदा सूर्य को अर्ध्य देकर यह पर्व मनाया। वाशिंगटन के उपनगर वर्जिनिया में स्टर्लिंग स्थित ऐतिहासिक पोटामैक नदी के किनारे 200 से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक एकत्र हुए। छठ का व्रत करने वाली चार महिलाओं ने नदी के पानी में डुबकी लगाई और भगवान सूर्य की अराधना की। पटना से आए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर कृपा एस सिंह ने बताया कि यहां पर मेरा यह तीसरा साल है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा भीड़ यहां एकत्र हुई है। सिंह की पत्नी अनिता ने पोटोमैक नदी पर छठ पूजा की। वर्ष 2009 में यहां पर अकेले छठ पूजा शुरू करने वाले सिंह ने कहा उम्मीद है कि सुबह यहां और लोग एकत्रित होंगे। यहां पर आये कुछ लोग दूर-दराज के भागों जैसे न्यूजर्सी से भी आए थे। [[.. Read More at अमेरिका में भी मनाया गया छठ पर्व by livehindustan.com

छठ पर्व पर हजारों ने दिया डूबते सूर्य को अर्घ्य by navbharattimes.indiatimes.com

नई दिल्ली।। सूर्य की उपासना का पर्व छठ उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में धार्मिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई में देश के अन्य हिस्सों में व्रतधारियों ने मंगलवार शाम को डूबते को अर्घ्य दिया। इस अवसर पर नदियों और तालाबों के तटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। भजनों और गीत-संगीत से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत 'नहाय खाय' से रविवार को हुई और सोमवार को धार्मिक अनुष्ठान 'खरना' किया गया जिसके तहत पकवान बनाए गए। मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया और बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व खत्म हो जाएगा। इस दौरान विवाहित महिलाएं 36 घंटे का उपवास रखती हैं। अर्घ्य के दौरान डूबते और उगते सूर्य को आटे से बने पकवान, दूध, गन्ना, केला और नारियल का भोग लगाते हैं। बिहार की राजधानी पटना सहित अन्य शहरों में यह पर्व धूमधाम से मनाया गया। इन शहरों में सभी सड़कों पर लोग नदियों और तालाबों की ओर रुख कर रहे थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी परिवार के साथ छठ...

'सूर्यलाई पुज्नेको जात र समुदाय नसोध्नू है !’ by eKantipur.com

काठमाडौ, कार्तिक १६ - नवदुलहीझैं सिंगारिएको रानीपोखरीमा मंगलबार साँझ ६० वषर्ीया अञ्जना शर्मा उपाध्यायले आकाशतिर हेर्दै पूजासामग्री मिलाउँदै थिइन् । रानीपोखरीको दक्षिणगेटको सुरुमै पूजास्थल बनाएर बसेकी वृद्ध आमा अञ्जनालाई पूरा परिवारले सघाइरहेका थिए । 'सूर्य पूजा गर्नेको जात र समुदाय सोध्नुहुन्छ र ?,' कान्तिपुरको एक प्रश्नमा उनले भनिन्, 'सूर्य त सबैको हो ।' जातपातको बेअर्थको झमेलामा पर्नुभन्दा तराई र पहाडले एक-अर्काको राम्रो पक्षको सिको गर्दै जानुपर्ने उनले सुझाव दिइन् । वीरगन्ज निवासी अञ्जनाले जागिरे छोरासँग राजधानी आएपछि पनि छठलाई छाडेकी छैनन् । उनले तीन वर्षदेखि राजधानीमा छठ व्रत बसिरहेकी छन् । 'एकअर्काबाट आस्था र धर्मका राम्रा पक्ष सिक्नुपर्छ,' वृद्धा आमालाई सघाइरहेका ४० वषर्ीय पुष्पराजले भने । एक निजी औषधि कम्पनीमा कार्यरत पुष्पराज आठ वर्षअघि सपरिवार राजधानी प्रवेश गरेका हुन् । पूरा मुलुकको भविष्यबारे निर्णय गर्ने राजधानीको जलाशय किनारमा जातीय भेदभाव र पुस्तान्तरलाई मेट्दै पूजा गर्नेको कमी थिएन । ललितपुर-२, कुपन्डोल गुसिंगालस्थित राममन्दिर छेउमा अस...

कमलपोखरीमा आयोजित छठ पर्वमा राष्ट्रपति सरिक by nagariknews.com

काठमाडौं, कात्तिक १५- काठमाडौँस्थित कमलपोखरीमा पहिलोपटक आयोजना गरिएको छठ पर्वमा राष्ट्रपति रामवरण यादव सहभागी भएका छन्। कमलपोखरी छठ पर्व व्यवस्थापन समितिको सक्रियतामा सो पोखरीलाई केही दिनअघि सरसफाइ गरी पूजाका लागि मिलाएको हो। सो अवसरमा राष्ट्रपति यादवले स्थानीय युवाहरुको क्रियाशीलतामा सो पोखरीलाई स्वच्छ बनाइ तीर्थस्थलको रुपमा विकास गरेकोमा खुसी व्यक्त गरे। सूर्यले मानिसलाई निरोग र समग्र सुख प्रदान गर्ने र पारिवारिक सुख सम्बृद्वि कायम गर्न सकिने विश्वासका साथ नेपालको तराइ भू-भागमा सिमित रहेको सो पर्व केही वर्षदेखि राजधानीमा पनि महत्वपूर्ण संस्कृतिका रुपमा विकसित हुँदै हिमाली, पहाडी, तराई सम्पूर्ण मूलका बीचमा लोकप्रिय हुँदै गएको छ। सो पर्व विभिन्न सङ्घसस्थाको आयोजना र प्रयासमा केही वर्षदेखि राजधानीका विभिन्न नदी, तलाउ, जलाशयलगायतका स्थानमा मनाइन थालेकाले महत्वपूर्ण संस्कृतिका रुपमा परिचय बनाउन सफल भएको हो। छठ पर्वमा भक्तजनले कात्तिक शुक्ल (षष्ठी आजको दिन) मा व्रत बसी अस्ताउँदो सूर्यलाई पूजा गरी सप्तमीका दिन सवेरै उदाउँदो सूर्यको पूजाका साथै अर्घ्य दिने गरिन्छ। सो अवसरमा विभिन्...

छठ पूजा की तैयारी पूरी, आज दिया जाएगा डूबते सूर्य को अर्घ्य by www.samaylive.com

आज डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस पर्व का समापन होगा. छठ पूजा के लिए दिल्ली में यहां यमुना नदी के तटों की सफाई की गई है तथा अन्य इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली सरकार के अनुसार लगभग 40 लाख लागों के यमुना तटों पर पहुंचने की संभावना है. छठ पर्व छठ, षष्ठी का अपभ्रंश है. कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के तुरंत बाद मनाए जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन है और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है. इसी कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया. छठ लोक आस्था का पर्व है जो सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध है. मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है. यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में. चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है. यह पर्व पारिवारिक सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए मनाया जाता है. छठ व्रत के सम्बंध में कई कथाएं प्रचलित हैं. एक कथा के अनु...

'अइसन तू करे अइलू छठि माई के घटिया, बड़ा रे कठिन कइलू छठि के बरतिया' आज रात बिखरेगी छठ गीतों की छटा by navbharattimes.indiatimes.com

शकुन रघुवंशी फरीदाबाद।। 'अइसन तू करे अइलू छठि माई के घटिया, बड़ा रे कठिन कइलू छठि के बरतिया' 'केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंड़राय' 'कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए' आदि अनेक भोजपुरी गीतों के माध्यम से छठ की महिमा को जानने का मन है तो हो जाएं तैयार। मंगलवार को शहर में विभिन्न घाटों पर छठ पूजा के लिए पहुंचने वाले व्रतियांे और उनके परिजनों का मनोरंजन करने के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार से कई लोक गायक बुलाए गए हैं। कुछ जगहों पर देर रात तक और कई जगहों पर रात भर गीत संगीत की महफिल जमेगी। सेक्टर-3 में पूर्वांचल विकास मंच ने लोगों को पूरी रात जगाने का कार्यक्रम बनाया है। मंच के प्रधान सुदीश कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने नीरज निराला और कृष्णा यादव को बिहार से बुलाया है। दोनों भोजपुरी गीतों के कलाकार हैं। दोनों ही मंगलवार रात 7.30 बजे से बुधवार सुबह 6 बजे तक गीतों की महफिल सजाएंगे। सेक्टर-3 में हनुमान मंदिर पर सुनील सुरीला, नंदकिशोर अकेला, धनेश आदि रात 8 बजे से 12 बजे तक सुर लहरी छेड़ेंगे। डबुआ कॉलोनी स्थित भोजपुरी-अवधी समाज ने पिंटू राज...

छठ पर्व आज, यसरी मनाइन्छ छठ by eKantipur.com

आज पारिवारिक सुख, शान्ति, कल्याण, रोगबाट मुक्ति तथा विभिन्न मनोकाङ्क्षा पूरा होस् भन्ने उद्देश्यअनुरूप श्रद्धापूर्वक अस्ताउँदो सूर्यलाई पूजाआजा अर्चना र अर्घ्य दिइ भोलि बिहान उदाउँदो सूर्यलाई पूजाआजा र अर्घ्य दिई छठ पर्व सम्पन्न गरिंदैछ । सूर्यको आराधना तथा व्रत पूजालाई ‘छठ’ पर्व भन्ने चलन छ । चैत महिनाको शुक्लपक्षमा ‘चैती छठ’ र कात्तिक महिनाको शुक्लपक्षमा ‘कात्तिकी छठ’ मनाउने परम्परा रहे पनि कार्तिकी छठको महत्व ठूलो भएकाले धेरै जसो श्रद्धालुहरूले कार्तिकी छठ मनाउने गरेका बुझिएको छ ।  मूलतः तराईवासी र मैथिल समाजले मनाउने विशेष चाडको रूपमा रहेको यो पर्वलाई सूर्य षष्ठी, स्कन्ध षष्ठी र छठी मइया आदिको नामले पुजिन्छ । छठ पर्वका अवसरमा तराईका नदी–तलाउमा श्रद्धालु भक्तजनको भिड लाग्ने गर्छ । छठ पर्वको रोचक पक्ष अस्ताउँदो सूर्यको पूजाआजा अघ्र्य दिइ रातभर व्रत, भजन किर्तन गरी उदाउँदो सूर्यको पूजाअर्चना अघ्र्य दिइ व्रत समाप्ति गरिने भएकाले छठपर्वलाई महत्वपूर्ण मानिन्छ । श्रद्धालु भक्तजनका अनुसार सात्विक र श्रद्धाका साथ गरिने यस पूजाबाट सुख शान्ति, धनधान्य र पुत्र प्राप्ति हुने ...